Saturday, 8 November 2014

अधूरा- सच


यू तो बात करते हे सभी अपने आदर्शो  कि
मगर पूरी  नहीं होती जब भी बात हो सच्ची
जाने  किन खयालो में यो रहते हे खुदा जाने
तमना हर किसी कि हर समय पूरी नहीं होती। ……………………


न सोचा था  कभी एक दिन की मौसम भी आएगा 
कूड़े के यू ढेरो से कोई रोटी चुराएगा 
वजह से जिनकी  जिंदगी आबाद हे इस ज़माने में [किसान ]
यही देखो सबक हमको जीवन अंत सीखते है


जिसे चाहा ,,जिसे पूजा वही  तो बेवफा निकला
सहीदो  कि शहादत से वही  तो बेखबर निकला
ज़माने में बिक़े हर चीज़,, जाने क्यों  यह लगता है [मुवाजा ]
कोई पूछे,जरा सोचे दिलो में दर्द कितना पलता  है /////

वेदना नारी की





अंधेरो कि काली छाया से मुझको डर  लगता हे
रावन कि तिरछी नज़रों से ही मुझको डर लगता हे
 मेरा डर नजायज नहीं , जायज पहलू ले बैठा हे
वयवसाय करण कि आंधी  ने मुझे बोझ समझ  के रखा हे


 जीवन का आरम्भ हुआ , संघर्ष तभी से जारी हे
सम्मानो को लड़ती आई हर अबला हर नारी हे
दुःशाशन आबाद हुए जब जब  कान्हा की मांग बड़ी
संसद भी थी मोन पड़ी जब जब नारी बेमौत मरी


नारी तो मरती रहती हे अपने ही चौराए पे
कही दहेज़ और कही तो अपनों की मनमानी पे
कही तेज़ाबो की बूंदे उसका तो जीवन वारे हे
और कही अग्नि की लपटों से ही सवर्ग सिधारे हे  \\\\\\

टिकट





    टिकट की माथापच्ची है.
   बात मेरी तो सच्ची ह 
   टिकट मुझे दिलवाद्ये प्यारे 
   मेरी इमेज न अच्छी है 
   इमेज मेरी जो अच्छी होती 
   तो क्या मै नेता बनता 
  छोड़ शरीफो कि मैफिल 
  मै  क्यों गुंडों में सामिल होता 
  चोर चोर मौसरे भाई कहावत कहलाती है 
  छल कपट के मंजर से सीता लंका को आती है
  जात पात में तुमे बाटकर हमने तो रोटी सेकी
 जब जब आते ही चुनाव ,,
  हमने वादो कि बोटी फेकी
 तुम सडको पर घुट घुट जीते
  ठाट भाट हम रहते है
 तुम तरसो तो बूँद बूँद
  हम भोग भी छपन लेते है
 शैतानो कि टोली भी
  हमसे तो डर कर रहती है
 हम जो रास्ता   काट दिए
 तो बिल्ली घर को लौटी है
मेरा सच न जाने कु कुछ फीका फीका लगता है
मेरी बातो के पीछे गन्घोर अंधेरा दीखता है 

Tuesday, 21 October 2014

ख़्वाब



 

      ये मेरे ख्वाबो के परिंदे रुक जा ,ठहर जा ,,थोड़ा               आराम    तो कर
      फिरे जो तेरे संग संग यह बेचैन दिल ,,इसे थोड़ा              शांत      तो कर
      तेरी आहटों से मचलाहटो का दोर आता हे
      तेरी सुगबुगाहट ओ  से हर गली , हर शहर में शोर            आता हे। \\\      to be cont.                      
                                 

मंजिल




मै चल निकला हु नई मंज़िल की और
नई सोच ,, नई आरज़ू ,,,नई दिशाएं लेकर
पाने उस मुकाम को ,,,जिसका सपना मेरी आँखो में पलता है
जिसको पाने की जिद ने मुझे जिन्दा रख रखा हे
मगर कुछ उन्सुल्झे सवाल अभी भी हे
क्या में यह कर पाउँगा जैसे ख्वाब  हे \\\\\

व्वस्था परिवर्तन की लडाई



धधक धधक तेरा दिल जले ,,,
 लहू को अपनी आंच दे ...
 मान दे सम्मान दे ,,
 तू खुद को सविमान दे ....
 जो हो चुका सो हो चुका ,,,
  तू इक नया इतिहास दे...
 जो दब चुकी आवाज़ है ,,
  उसको तो थोड़ी धार दे 
  वार तुज़ पे हो रहे ,,,
  तू चैन से है क्यों पड़े ....
  खतरे में तेरी जान ,,
   पल पल लुटता इमान है ..
  जो रहनुमा थे ,,,
  आज कल कातिलो में सुम्मार हे 
  चोर सारे बन चुके है ,,
  घर अपना भर चुके है 
 लूटने चले हे अब  तेरे 
  घर की आन को 
 मान को सम्मान को 
  तेरे सविमान को,
 वरना मत कहियो यार 
 यह  दुनिया बेकार है ,,,
 खाने का आकाल है 

 मेरा नेता मालामाल है ,,,,
नौकरी वौकरी  है नहीं 

 ना ही सम्मान है ,,,,,
दवाई कहाँ से लाऊ यारो 

 मेरा बच्चा बीमार है ////

हम से





   हज़ारो आँसुओ को छुपाकर,,,
  होठों से मुस्कुराना कोई हम से सीखे

  दिल में पलते हर इक जख़्म को दबाकर ,,,
,जीना  कोई हम से सीखे

  यू तो रोज गालियां देते हे हम इन नेताओ को
 मगर मौजूदगी में इनकी खुशामत करना कोई हम से सीखे \\\\\\\\\\